Maldives envoy tells India to Pull Out Military Choppers, Personnel as Chinese influence grows


Maldives envoy tells India to Pull Out Military Choppers, Personnel as Chinese influence grows

हमें सैन्य हेलिकॉप्टरों और सैनिकों की जरूरत नहीं, उन्हें वापस बुला लें: मालदीव के राजदूत की भारत से मांग

नई दिल्ली. मालदीव ने भारत से अपने सैन्य हेलिकॉप्टर और सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है। भारत के दो हेलिकॉप्टर और करीब 50 सैनिक इस वक्त मालदीव में हैं। इन्हें दोनों देशों के बीच एक समझौते के तहत वहां भेजा गया था। हालांकि, जून में समझौता खत्म होने के बाद अब मालदीव के राजदूत ने भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन्हें वापस बुलाने के लिए कहा है। भारत के लिए मालदीव में ये सबसे बुरी स्थिति मानी जा रही है, क्योंकि चीन पहले ही वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं में बड़े स्तर पर निवेश कर पैठ बना चुका है। 

दरअसल, मालदीव में इसी साल की शुरूआत में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राजनीतिक बंदियों को छोड़ने का आदेश दिया था। मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार करते हुए वहां 15 दिन की इमरजेंसी लागू कर दी थी। इस राजनीतिक संकट में मालदीव के विपक्षी नेता और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से सैन्य दखल की गुहार लगाई थी। भारत ने भी मालदीव के हालात पर चिंता जताई थी। जिसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद पैदा हो गया था। 

 

भारत के लिए अहम क्यों है मालदीव?

साव चार लाख की आबादी वाला मालदीव भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। हिंद महासागर में होने की वजह से ये देश भारत के लिए बेहद अहम है। अब तक कोई भी देश हिंद महासागर में भारत के विपक्ष में नहीं खड़ा हुआ है। हालांकि बीते कुछ समय में चीन ने वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत यहां निवेश करना शुरू किया है। 2011 तक चीन का मालदीव में कोई दूतावास भी नहीं था, लेकिन अब चीन वहां मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी में है। दोनों देशों के बीच हालिया समय में कई व्यापार समझौते भी हुए हैं।

माना जा रहा है कि चीन मालदीव के बहाने भारत को घेरना चाहता है। उसने श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर भी निवेश किया है। 



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